कार्तिक पूर्णिमा को किए दान का मिलता है अक्षय फल

मल्टीमीडिया डेस्क। एक वर्ष पंद्रह पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है, तो 16 पूर्णिमा मनाई जाती हैं। इस महीने की चार तारीख यानी चार नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू धर्म के लिए ही नहीं, सिखों के लिए भी कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा, महाकार्तिकी या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है।

सृष्टि के आरंभ से ही कार्तिक पूर्णिमा की तिथि खास रही है। स्कंद पुराण, नारद पुराण पद्म पुराण आदि में इस दिन स्नान,व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। इसका महत्व सिर्फ वैष्णव भक्तों के लिए ही नहीं शैव भक्तों और सिख धर्म के लिए भी अधिक है।

वैष्णव भक्तों के लिए इसलिए है खास –

विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन इसलिए खास है क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था। प्रथम अवतार में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में थे। भगवान को यह अवतार वेदों की रक्षा,प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों,अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इससे सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हुआ।

इस दिन शिव बने थे त्रिपुरारी –

शिव भक्तों के अनुसार इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का संहार कर दिया जिससे वह त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए। इससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिव जी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है। इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छह कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की कृपा बनी रहती है।

सिखों के लिए इस दिन का महत्व –

कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।

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