गुरु नानक जयंती पर जानें उनकी नौ सीखें जो आज भी हैं प्रसांगिक

मल्टीमीडिया डेस्क। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष गुरुनानक देव जी का प्रकाशोत्सव पर्व 4 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। गुरु नानकदेवजी का जन्म रात्रि लगभग 1 बजकर 40 मिनट पर हुआ था। अतः इसके लिए रात्रि जागरण किया जाता है।

गुरु नानक देव का जन्म लाहौर के पास तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ। गुरुनानक का जहां जन्म हुआ था वह स्थान आज उन्हीं के नाम पर अब ननकाना के नाम से जाना जाता है। नानक देव सिख धर्म के संस्थापक हैं। उन्होंने भारत सहित अनेक देशों की यात्राएं कर धार्मिक एकता के उपदेशों और शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार कर दुनिया को जीवन का नया मार्ग बताया।

गुरु नानक जी के दिए गए मूल मंत्र आज भी प्रासंगिक हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी का आरंभ मूल मंत्र से होता है। उन्होंने जो नौ सीखें दी थीं, वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी पहले थीं। जानते हैं इसके बारे में…

एक ओंकार : अकाल पुरख (परमात्मा) एक है। उसके जैसा कोई और नहीं है। वो सब में रस व्यापक है। हर जगह मौजूद है।

सतनाम : अकाल पुरख का नाम सबसे सच्चा है। ये नाम सदा अटल है, हमेशा रहने वाला है।

करता पुरख : वो सब कुछ बनाने वाला है और वो ही सब कुछ करता है। वो सब कुछ बनाके उसमें रस-बस गया है।

निरभऊ : अकाल पुरख को किससे कोई डर नहीं है।

निरवैर : अकाल पुरख का किसी से कोई बैर यानी दुश्मनी नहीं है।

अकाल मूरत : प्रभु की शक्ल काल रहित है। उन पर समय का प्रभाव नहीं पड़ता। बचपन, जवानी, बुढ़ापा मौत उसको नहीं आती। उसका कोई आकार कोई मूरत नहीं है।

अजूनी : वो जूनी यानी योनियों में नहीं पड़ता। वो न तो पैदा होता है न मरता है।

स्वैभं : उसको किसी ने न तो जनम दिया है, न बनाया है वो खुद प्रकाश हुआ है।

गुरप्रसाद : गुरु की कृपा से परमात्मा हृदय में बसता है। गुरु की कृपा से अकाल पुरख की समझ होती है।

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